अंधेरे में चमकती आँखें – एक रहस्यमयी कहानी

शहर से दूर दाईं के बीच बसा छोटा-सा गाँव “नवापुर” दिन में जितना शांत दिखता था, रात होते ही उतनी ही रहस्यमयी लगने लगता था। गाँव वालों के बीच कई सालों से एक चर्चा घूमती थी—
“जंगल के अंदर एक पुराना घर है… रात में वहाँ दो चमकती आँखें दिखाई देती हैं।”
कोई नहीं जानता था कि वे आँखें किसकी हैं—इंसान की, जानवर की या किसी और चीज़ की। डर की वजह से सालों से कोई उस हवेली के पास जाने की हिम्मत नहीं करता था।
लेकिन कहानी की असली शुरुआत होती है तब, जब राघव नाम का 22 साल का युवक गाँव में रहता है। शहर की भीड़भाड़ से दूर, शांति की तलाश में आए राघव को ऐसे रहस्य हमेशा खींचते थे।
पहली रात—रहस्य का पहला संकेत
राघव अपने मामू के पुराने घर में रहने लगा था। पहली ही रात, खिड़की से बाहर देखते हुए उसे दूर जंगल के अंधेरे में दो रोशनी-हल्की लाल चमकती आँखें दिखाई देती हैं।
शुरू में उसे लगा कि शायद कोई जंगली जानवर होगा, पर वे चेहरे जिस तरह स्थिर होकर उसे देख रही थीं, वह असामान्य था।
अगली सुबह उसने यह बात अपनी पड़ोसन शांति काकी को बताई।
शांति काकी का चेहरा देखते ही रोशनी पड़ गया।
उन्होंने कहा, “बेटा, उधर मत देखा कर… वहाँ पुरानी हवेली है। जाने कितनी अनहोनी जुड़ी है वहाँ से। हम सब उसे अशुभ मानते हैं।”
राघव ये सुनकर और ज़्यादा उत्सुक हो गया।
दूसरी रात—आवाज़ों का रहस्य
उस रात राघव ने तय किया कि वह फिर से खिड़की के पास बैठेगा। जैसे ही घड़ी ने 12 होम, वही चमकती आँखें फिर दिखाई देंगी।
पर इस बार आँखों के साथ एक धीमी-सी आवाज़ भी आ रही थी, जैसे कोई मदद माँग रहा हो—
“बचाओ… कोई है?”
राघव का दिल ज़ोर से धड़कने लगा।
क्या कोई सच में वहाँ फँसा है?
या फिर यह सिर्फ़ उसका भ्रम है?
सच जानने का फैसला
अगली सुबह राघव ने गाँव के बुज़ुर्ग नारायण बाबा से बात की। नारायण बाबा ने उसे एक पुरानी कहानी सुनाई—
“सालों पहले उस हवेली में मेहर अंकल नाम का व्यक्ति रहता था। वह गाँव का सबसे कुशल जड़ी-बूटी खोजने वाला था, पर उसके बेटे की अचानक मौत के बाद वह टूट गया। कहते हैं, मेहर अंकल हवेली छोड़कर कहीं चला गया। बस वही दिन था, जब हवेली में अजीब चीज़ें दिखाई देने लगीं। शाम होते ही किसी के रोने की आवाज़, और रात को चमकती आँखें…”
यह कहानी सुनकर राघव ने फैसला किया—
वह इस रहस्य को सुनेगा।
हवेली तक का सफर
तीसरी रात राघव अपने साथ टॉर्च, एक लाठी और मोबाइल लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा। रास्ता सूना था। पत्तों की छन-छन, हवा की सीटी जैसी आवाज़ और दूर किसी उल्लू की आवाज़ माहौल को और डरा बना रही थी।
जैसे-जैसे वह हवेली के करीब पहुँच रहा था, उसे महसूस हुआ कि कोई उसे दूर से देख रहा है।
हवेली टूटी-फूटी और काई से भरी हुई थी। दरवाज़े पर मूर्तियों का कोई निशान नहीं था। अंदर अंधेरा इतना था कि टॉर्च की रोशनी भी कम लग रही थी।
हवेली के अंदर—चमकती आँखों से सामना
अचानक राघव को कमरे के एक कोने से वही लाल चमकती आँखें दिखाई देती हैं!
वह डरकर पीछे हट गया, पर उसने हिम्मत बढ़ाकर टॉर्च को सीधा उस दिशा में घूमा।
वह हैरान रह गया।
उस सामने कोई भूत या जानवर नहीं…
बल्की एक बूढ़ा इंसान खड़ा था!
रहस्य का खुलासा—मेहर चाचा जीवित थे
उस व्यक्ति की आँखें असामान्य रूप से चमक रही थीं। बाद में पता चला कि उसकी बीमारी और लगातार अँधेरे में रहने की वजह से उसकी आँखें तेज़ रोशनी में अलग दिखाई देती थीं।
वह धीरे-धीरे बोला, “डरो मत बेटा… मैं मेहर हूँ।”
राघव सन्न रह गया—
गाँव वाले आँखें थीं कि मेहर चाचा मर गए हैं, पर वे जीवित थे!
मेहर अंकल ने अपना दर्द बताया—
“बेटे की मौत के बाद मैं टूट गया था। लोगों की बातें सुनकर मैं मकान में अकेला रहने लगा। लेकिन मैं किसी को नुकसान नहीं पहुँचाता। जो आवाज़ें तुमने सुनीं, वो मेरी थीं… मुझे कई रातें बुखार में मदद की ज़रूरत थी, पर कोई आया ही नहीं।”
राघव की उल्टी नम हो गई।
उसे समझ आया कि डर और अफवाहों ने एक इंसान को अकेलेपन में धकेल दिया था।
सच्चाई गाँव तक पहुँचना
अगले दिन राघव मेहर अंकल को गाँव ले आया।
गाँव वाले पहले डर रहे थे, पर जब उन्हें पूरी कहानी समझाई गई, तो उनके मन का भ्रम टूट गया।
शांति काकी बोलीं, “हमसे गलती हो गई। डर ने हमें अंधा बना दिया। क्षमा कीजिए अंकल।”
गाँव वालों ने मिलकर मेहर अंकल का इलाज कराया।
उनकी तबीयत धीरे-धीरे ठीक होने लगी।
और इसके बाद वह हवेली अब डर का नहीं, बल्कि सीख का प्रतीक बन गई—
डर अक्सर सच्चाई को छुपा देता है, अगर कोई हिम्मत करके सच सामने लाए… तो अंधेरा भी उजाला बन सकता है।
कहानी का संदेश
हर रहस्य डरा नहीं होता।
जो हम अंधेरे में देखते हैं, वह हमेशा वैसा नहीं होता जैसा हम घबराते हैं।
अफवाहें एक इंसान की जिंदगी को बदल सकती हैं, इसलिए सच्चाई जानना ज़रूरी है।
कहानी के कथानक की तालिका
| पत्र का नाम | कहानी में भूमिका | विवरण |
|---|---|---|
| राघव | मुख्य नायक | शहर से आया युवक, जिज्ञासु और बहादुर। वही हवेली का रहस्य उभरता है। |
| मेहर | चाचा | रहस्य का मुख्य केंद्र जड़ी-बूटी विशेषज्ञ, अपने बेटे के दुख में हवेली में अकेले रह गए। उनकी आकृति बीमारी के कारण चमकती थीं। |
| शांति | काकी पड़ोसन | गाँव की बुजुर्ग महिला जो हवेली से डरती और राघव को सावधान करती है। |
| नारायण | बाबा गाँव के बुजुर्ग | वे हवेली और मेहर चाचा के अतीत के बारे में जानकारी देते हैं। |
| गाँव वाले | सहायक पात्र | अफवाहों और डर के कारण मेहर चाचा से दूर रहते हैं, बाद में सच जानकर मदद करते हैं। |