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खोया हुआ कमरा नंबर 13

खोया हुआ कमरा नंबर 13

कमरा

पुराने शहर के समुद्र तट एक बहुत पुरानी इमारत थी – शांति।

नाम के बिल्कुल उलट, इस इमारत के बारे में लोग कहते थे कि यहां कभी शांति नहीं रहती।

दिन में वह एक साधारण सी इमारत खड़ी थी, लेकिन रात को ही उसकी शिल्पी डरावनी बन गयी।

इस इमारत की सबसे रहस्यमयी बात थी – कमरा नंबर 13।

अजीब बात यह थी कि बिल्डिंग में कमरा 1 से 12 तक थे, फिर सीधे 14 से शुरू हो गए।

कमरा नंबर 13 का कोई नामोनिशान नहीं था।

ना किसी रजिस्ट्रेशन में, ना किसी रजिस्टर में।

फिर भी…

लोग कहते हैं कि रूम 13 मौजूद है।

रहस्यमयी अफवाहें

कहते हैं कि जो भी व्यक्ति कमरा नंबर 13 को पुनर्जीवित करने का प्रयास करता है, वह या तो डर के भाग जाता है या फिर कभी वापस नहीं आता है।

कुछ लोगों ने दावा किया कि उन्होंने आधी रात को उस कमरे से बातें कीं–

कभी किसी के रोने की,

तो कभी दीवारों से अति फुसफुसाहट की।

इन बातों को लोग बस कहानियाँ मानते थे।

लेकिन आरव ऐसा कोई चिह्न नहीं था।

आरव की जिज्ञासा

आरव एक युवा लेखक थे, जिन्हें रहस्यमयी कहानियाँ गीक का शौक था।

उनका कहना था कि हर अफवाह के पीछे कोई न कोई सच्चाई ज़रूर होती है।

जब उसने शांति निवास और खोए हुए कमरा नंबर 13 के बारे में सुना, तो उसे लगा-

“यही मेरी अगली कहानी होगी।”

आरव ने तय किया कि वह इस रहस्य की तह तक जाएगा।

शांति निवास में प्रवेश

एक शाम सर्व शांति निवास।

इमारत के दरवाज़े पर एक बूढ़ा खलनायक था – रामदीन।

“बाबू, यहाँ क्यों आये हो?”

रामदीन की आवाज़ में डर साफ झलक रहा था।

“कैमरा नंबर 13 के बारे में जानना चाहता हूँ,”

आरव ने सीधे कहा.

यह पोस्ट ही रामदीन का चेहरा पीला पड़ गया।

“बाबू, उस कमरे का नाम मत लो। वो कमरा नहीं… एक सज़ा है,”

अकेला वह चुप हो गया।

पहला सुराग

आरव ने बिल्डिंग में रहने वाली एक बुज़ुर्ग महिला शारदा देवी से बात की।

उन्होंने बताया कि कई साल पहले यहां एक होटल था।

“कमरा नंबर 13 में एक शीर्षक था,”

उन्होंने मध्यम आवाज़ में कहा।

“एक रात अचानक कुछ ऐसा हुआ कि होटल बंद हो गया।”

लेकिन क्या हुआ –

यह सवाल हर कोई तलब करता था।

खोया हुआ नक्शा

अरव को बिल्डिंग के पुराने स्टोर रूम में एक कूड़ा भरा नक्शा मिला।

दस्तावेज़ में साफ़ लिखा था –

कमरा नंबर 13.

लेकिन अजीब बात यह थी कि उस कमरे तक जाने वाले रास्ते की दीवार के पीछे छुप गया था।

आरव का दिल तेजी से देखने लगा।

आधी रात का सच

रात के ठीक 12 बजे आरव ने उस दीवार को हिलाया।

जैसे ही उसने दीवार पर दबाव डाला,

एक छोटी सी आवाज़ आई —

और दीवार खिसक गयी।

सामने था –

कमरा नंबर 13.

कमरे के अंदर अजीब सी ठंडक थी।

दीवारों पर पुराने निशान थे,

और हवा में भारीपन।

कमरे का रहस्य

कमरे के बीचों-बीच एक पुरानी डायरी रखी थी।

आरव ने उससे कहा।

डायरी में लिखा था कि उस परिवार पर होटल के मालिक ने पोल इल्ज़ाम लगाया था।

उन्हें इसी कमरे में बंद कर दिया गया था।

भूख, डर और अन्याय ने उस परिवार को ख़त्म कर दिया।

कमरा नंबर 13 पर छुपी हुई चीजें दी गईं, ताकि सच्चाई सामने न आए।

दर्पणों की मुक्ति

आरव को अचानक लगा जैसे कमरे में हवा का झोंका हो रहा हो।

उसे महसूस हुआ कि आत्मा अब शांति चाहती है।

अगली सुबह आरव ने यह पूरी सच्चाई पुलिस और मीडिया को बताई।

शांति का सच सबके सामने आ गया।

रूम नंबर 13 अब खोया नहीं हुआ.

कहानी का अंत नहीं, शुरुआत

आरव ने यह अनुभव एक किताब पर लिखा।

अब शांति निवास की जगह नहीं,

बल्कि सच्चाई और न्याय की मिसाल बन गयी।

और कमरा नंबर 13…

अब सिर्फ एक कमरा नहीं,

बल्कि एक सबक था –

कि सच्चाई फिर भी छुपी जाए,

एक दिन ज़रूर सामने आया है।

 

कहानी के बारे में कहानियां

पात्र का नामभूमिका (कहानी भूमिका)
आरवमुख्य पात्र, लेखक और रहस्य पुनः प्राप्त करने वाला
रामदीनवाचक, जो कमरे का पता है
शारदा देवीपुरानी निवासी, अतीत के साक्षी
होटलमालिक नेगेटिव पात्र, अन्याय करने वाला
बंद परिवार पीड़ित,परमाणु आत्मा कक्ष से जुड़े हुए हैं
पुलिस की हकीकतसामने आई सामने
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