गायब होते लोग — एक रहस्य कहानी

धूप ढँकने लगी थी और ऊँचाई के बीच बसा छोटा-सा कस्बा रामगढ़ हमेशा की तरह शांत था। लोग अपने घरों की ओर लौट रहे थे, बाजार की आखिरी दुकानें बंद हो रही थीं और हवा में देवदार के ठहरने की खुशबू थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों से इस शांत कस्बे का माहौल बदल गया था। कस्बे में एक डर फैल गया था—लोग रहस्यमयी तरीके से गायब हो रहे थे।
सबसे पहले गायब हुए थे शेखर काका, जो शाम को रोज़ की तरह अपनी चाय की दुकान बंद करके घर निकले थे, पर उस रात घर पहुँचे ही नहीं। कुछ लोगों ने कहा कि उन्होंने उन्हें जंगल की ओर जाते देखा था, कुछ ने कहा कि किसी अजनबी से उनकी बहस हो रही थी। लेकिन कोई पक्की बात साबित नहीं हुई।
दूसरी घटना तब हुई जब स्कूल की अध्यापिका मीरा जी सुबह बच्चों को पढ़ाएँ निकलीं और दोपहर तक वापस नहीं लौटीं। उनके घरवालों ने पुलिस में रिपोर्ट की, लेकिन मीरा जी का भी कोई सुराग नहीं मिला।
अब तक पाँच लोग गायब हो चुके थे, और कस्बा डर से सिहर उठा था। किसी को नहीं पता था कि कौन ले जा रहा है, क्यों ले जा रहा है, और कहाँ ले जा रहा है।
इस सबके बीच कहानी का असली नायक आता है—आरव, एक 22 साल का युवा, जो हाल ही में शहर से वापस अपना गाँव आया था। आरव काफ़ी समझदार, शांत और जिज्ञासु स्वभाव का लड़का था। उसे बचपन से ही रहस्यों को मिलाने का शौक था। जब उसने सुना कि गाँव में लगातार लोग लापता हो रहे हैं, तो उसने खुद इस मामले की जांच शुरू करने की थानी।
रहस्य की पहली कड़ी
आरव को सबसे पहले शेखर काका की दुकान से कुछ अजीब मिला। मेज के नीचे मिट्टी में विशिष्टताओं के दो अलग-अलग निशान थे—एक तो शेखर काका के लग रहे थे, लेकिन दूसरा निशान बहुत बड़ा था, जैसे किसी भारी-भरकम आदमी का जूता। दुकान के बाहर तक जाते वे निशान अचानक गायब हो जाते थे, जैसे हवा में घुल गए हों।
आरव को लगा कि शायद यह मामला आसान नहीं है।
जंगल का आतंक
रामगढ़ की पुरानी कहानियों में कहा जाता था कि गाँव के पीछे वाले जंगल में रात को कोई अजीब-सी रोशनी दिखती है। लोग बताते थे कि वहाँ किसी “पुरानी कोठी” की अनगिनत दीवारों के बीच अजीब आवाजें आती हैं, लेकिन लोग इसे सिर्फ़ मान्यता मानकर नज़रअंदाज़ कर देते थे।
आरव ने तय किया कि अब जंगल में जाकर देखना पड़ेगा।
अगली शाम, वह अपनी टॉर्च, कैमरा और एक नोटबुक लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा। ठहरने के बीच अँधेरा बढ़ गया था और हवा की सरसराहट डर को और गहरा कर रही थी। चलते-चलते अचानक उसे ज़मीन पर किसी का दुपट्टा मिला। वह वही दुपट्टा था जो मीरा जी रोज़ पहनती थीं। अब आरव के पैरों तले ज़मीन खिसक गई—यह पहली ठोस कड़ी थी।
जैसे-जैसे वह जंगल के अंदर जाता गया, हवा और भारी होती गई। तभी उसे ठहरने के पीछे रोशनी-सी चमकती रोशनी दिखी। वह रोशनी की दिशा में बढ़ा और स्थिरता-सी दिखाई देती पुरानी कोठी के सामने जा पहुँचा।
सच्चाई की ओर एक कदम
कोठी के अंदर पूरी तरह अँधेरा था। आरव ने टॉर्च जलाई और धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। तभी पीछे से किसी के घूमने की आवाज़ आई। वह मुड़ा तो वहाँ कोई नहीं था। दिल तेज़ी से धड़कने लगा, लेकिन वह रुका नहीं।
कमरे के अंदर धूल और मुलायम फ़र्नीचर के बीच उसे कुछ कागज़ के टुकड़े मिले—पुरानी डायरी के पन्ने।
इन पन्नों में लिखा था:
“नई दवाओं पर प्रयोग जारी है। टेस्ट के लिए और लोगों की ज़रूरत है। गाँव के लोग आसान शिकार हैं। कोई शक नहीं करेगा…”
आरव स्तब्ध रह गया—यह कोई वैज्ञानिक था, कोई शोधकर्ता, जो इंसानों पर प्रयोग कर रहा था!
अंधेरे में मौजूद खतरनाक सच
अचानक कमरे में तेज़ आवाज़ हुई और दरवाज़ा अपने-आप बंद हो गया। टॉर्च की रोशनी में आरव ने कमरे के कोने में एक लोहे का बड़ा दरवाज़ा देखा। वह धीरे-धीरे बंद गया और अंदर झाँका—यह देखकर उसकी साँस रुक गई।
अंदर पाँच लोग बंद थे—शेखर काका, मीरा जी और बाकी तीन लापता लोग। सभी कमजोर और डरे हुए थे।
उनमें से एक ने धीमी आवाज में कहा, “हमें यहाँ एक आदमी कैद करके लाया है। वह कहता है कि वह बीमारी ठीक करने की दवा बना रहा है, लेकिन हम नहीं जानते कि वह क्या कर रहा है। रात को वह अजीब इंजेक्शन लाता है और हमारे शरीर पर कुछ टेस्ट करता है।”
आरव अभी किसी को बाहर निकाल पाता, इससे पहले दरवाज़े पर पैदल की आवाज सुनाई दी।
कमरे में एक लंबा, दुबला-पतला आदमी अंदर आया—उसकी आँखों में पागलपन था। उसने सफेद कोट पहन रखा था।
“ओह… नया मेहमान?” वह हँसा।
यह वही वैज्ञानिक था—डॉ. केशव, जो कभी बड़े शहर में रिसर्चर था लेकिन अपनी गैरकानूनी गतिविधियों के कारण अस्पताल से निकाल दिया गया था। वह जंगल की इस कोठी में छिपकर अपने “टेस्ट विषय” यानी इंसानों पर प्रयोग कर रहा था।
आरव की बहादुरी
आरव ने हिम्मत जुटाई और मौका देखकर डॉ. केशव को धक्का दिया। उसकी टॉर्च गिर गई लेकिन वह तेजी से दरवाजा खोलने लगा।
शेखर काका ने कहा, “जल्दी करो बेटा, वह उठने वाला ही है!”
आखिरकार सभी लोग कमरे से बाहर निकल गए। लेकिन बाहर निकलते ही डॉ. केशव फिर सामने आ गया। वह आरव की ओर झपटा, लेकिन इसी बीच आरव ने पास पड़ी लकड़ी उठाई और उसके हाथ पर मार दी।
वह चिल्लाकर जमीन पर गिर पड़ा।
चरित्रों की तालिका
| किरदार | कहानी में भूमिका | महत्व |
|---|---|---|
| आरव | कहानी का मुख्य नायक | रहस्य सुलझाता है, लोगों को उठाता है |
| शेखर | काका पहला गायब होने वाला व्यक्ति, | चायवाला घटना की शुरुआत की वजह, सबूत का पहला स्रोत |
| मीरा जी | स्कूल अध्यापिका, | लापता व्यक्ति जंगल में मिले सुराग की मुख्य कड़ी |
| डॉ. केशव | वैज्ञानिक, | मुख्य खलनायक लोगों पर अवैध प्रयोग करता है |
| रामगढ़ के लोग | सहायक पात्र | झरना में डर और माहौल दिखाते हैं |
| पुलिस | अधिकारी कहानी के | अंत में मदद अपराधी को गिरफ्तार करते हैं |