सनसन रोड पर मिला मामला

शहर के बाहर वह सड़क पर दिन में भी कम ही लोग दिखाई देते थे। रात में तो उसका नाम भी लोग ताल देते थे। मृतकों की लंबी छायाएँ, टूटी हुई स्ट्रीट लाइटें और हवा में अजीब सी सरसराहाट—सब मिलकर उस रास्ते को और अज्ञात बनाते थे।
रवि उसी सड़क से रोज़ ऑफिस से घर लौटता था। वह एक सामान्य इंसान थी—न अधिक बोलने वाला, न अधिक डरने वाला। लेकिन उस रात कुछ अलग था. आकाश में बादल छाए हुए थे, मोबाइल नेटवर्क ख़राब था और सड़क पूरी तरह से सुनसान थी।
अचानक उसकी दृष्टि सड़क के किनारे एक पुरानी बेंच पर रखी गई। वहां कुछ रखा गया था—एक लिफाफा।
रवि ने सबसे पहले यह सपना देखा, लेकिन उनके कदम रुक गए। लिफाफा सफेद नहीं था, बल्कि चमकीला पीला, जैसे बहुत पुराना हो। उस पर शक से लिखा था—
“अगर ये पढ़ रहे हो, तो तुम चुनो जाइये हो।”
रवि का दिल तेज़ देखने लगा। उसने चारों ओर देखा—कोई नहीं था। बस हवा की आवाज़।
उसने काँपते हाथों से खाई।
की पहली पंक्ति
“इस सड़क पर हर रात एक सच दबा रहता है। अगर तुम चिंतित हो, तो आगे पढ़ो।”
रवि ने गहरी सांस ली। वह ख्वाहिश रखता है कि उसे भी बर्बादी नहीं मिले। कुछ था उस शब्द में—जैसे उसे कोई जानता हो।
खत में लिखा था कि दस साल पहले इसी सड़क पर एक घटना घटी थी। एक आदमी अचानक गायब हो गया। ना कोई रिपोर्ट, ना कोई मौत। बस एक नाम बचा था—अजय वर्मा।
रवि चौंक गए। यह नाम उसने सबसे पहले सुना था। अजय वर्मा कभी उसी ऑफिस में काम करते थे, जहां रवि अब काम करते हैं।
ख़त के आख़िर में लिखा था—
“अगर सच में पता है तो कल रात 11 बजे इसी जगह पर आना। अकेले।”
डर और जिज्ञासा
पूरी रात रवि सो नहीं मिला। दिमाग में बस वही सवाल घूमता रहा—यह खत लिखा? और क्यों?
अगले दिन उसने अपने दोस्त समीर से बात की। समीर पत्रकार थे और रहस्यमयी बातें गहराई में डूबे हुए थे।
समीर ने कहा,
“रवि, अगर ये मजाक है तो बहुत खतरनाक हो सकता है। लेकिन अगर सच है तो ये एक बड़ी कहानी हो सकती है।”
रवि ने तय किया—वह होगा। लेकिन अकेले नहीं. वह दूर से समीर को नजर बनाए रखने को कहेगा।
रहस्यमयी मुलाकात
रात के ठीक 11 बजे रवि उस सनसन रोड पर खड़ा था। दिल-ज़ोर से धड़क रहा था। अचानक पीछे से एक आवाज़-
“तुम आ गये।”
रवि पलटा। सामने एक बूढ़ा आदमी खड़ा था। चेहरे पर झुर्रियाँ, आँखों में गहरा दर्द।
उन्होंने कहा,
“मेरा नाम हरिहर है। और मैं ही अजय वर्मा का दोस्त था।”
हरिहर ने बताया कि दस साल पहले अजय ने एक बड़े घोटाले का पता लगाया था। उसी सड़क पर उनकी आखिरी मुलाकात कुछ लोग से हुई थी। उसके बाद वह कभी नहीं मिला।
हरिहर ने कहा,
“लोगों ने उसे पागल कहा, लेकिन वह सच के बहुत करीब था।”
सच का लोड
हरिहर ने रवि को एक पुरानी डायरी दी। इसमें अजय की लिटविट थी। इसमें नाम, तारीख और साक्ष्य शामिल थे।
अचानक सड़क के दूसरी ओर एक कार की लाइट जली। हरिहर घबरा गया।
“वे लोग अब भी यहाँ हैं,” उसने कहा।
वही पल समीर सामने आया। उन्होंने सभी कुछ कैमरे रिकॉर्ड कर लिए थे।
कार फास्ट से पास आई, लेकिन तभी पुलिस की सायरन ने कहा। समीर ने पहले ही पुलिस को सूचना दे दी थी।
अधूरा नहीं रहा सच
कुछ दिनों बाद वह चर्चों में छाया रही। अजय वर्मा का सच आया सामने। जिन लोगों ने उन्हें मिठाई की कोशिश की थी, उन्हें सज़ा मिली।
हरिहर ने चैन की सांस ली। उन्होंने कहा,
“अब अजय की आत्मा को शांति मिलेगी।”
रवि ने फिर से उस सड़क का अवलोकन किया, लेकिन अब वह सड़क का अवलोकन नहीं करता। अब उसने उसे याद दिलाया है कि-
असली खुर कितना भी दबाया हो, एक दिन सामने आ ही जाता है।
कहानी के मुख्य पात्र और उनकी भूमिका
| पात्र का नाम | कहानी में भूमिका |
|---|---|
| रवि मुख्य पात्र, | जो कहानी है और जो सच तक पहुँचता है |
| समीर | रवि के दोस्त और पत्रकार, जो सच्चाई को सामने लाने में मदद करते हैं |
| अजय वर्मा | रहस्यमयी रूप से अदृश्य व्यक्ति की कहानी का सच सामने आता है |
| हरिहर | अजय का दोस्त, जिसने सच सामने लाने की कोशिश की |
| अज्ञात | लोग वे लोग पूछते हैं सच पहाड़ की कोशिश की |